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प्रकाश संश्लेषण कैसे होता है

प्रकाश संश्लेषण कैसे होता है

Photosynthesis In Hindi : दुनिया के हर जीव को जीवित रहने के लिए भोजन की जरूरत होती है. और सभी शाकाहारी जीव अपना भोजन पेड़ पौधों से लेते हैं उसी तरह पेड़ पौधे भी जीवित रहने के लिए अपना भोजन तैयार करते हैं. हमारा ज्यादातर भोजन पेड़ पोधों से आता है. जैसे आलू,और फल फ्रूट आदि हमें पेड़ों से प्राप्त होते हैं.पौधे अपना खाना स्वयं तैयार करते हैं और खाना बनाने में पेड़ों की सहायता उनकी पत्तियां जड़े और उनका तना भी करते हैं. पेड़ों को अपना खाना बनाने के लिए गर्मी की जरूरत होती है. जो उन्हें सूर्य से मिलती है. पौधों को खाना पकाने के लिए पानी की जरूरत भी होती है. और पानी और गर्मी के अलावा इनको पोषक तत्व और कार्बन डाइऑक्साइड की जरूरत भी होती है. खाना बनाने के लिए पौधों की जड़ें मिट्टी में से पानी और पोषक तत्व को अवशोषित करके पौधे के और भागों में पहुंचाती हैं और फिर तना उन पोषक तत्वों को पतियों तक पहुंचाने का कार्य करता है.

प्रकाश संश्लेषण की परिभाषा : हरे पौधे सूर्य के प्रकाश के द्वारा क्लोरोफिल की उपस्थिति में कार्बन डाइऑक्साइड और पानी के द्वारा कार्बोहाइड्रेट बनाते हैं और ऑक्सीजन गैस बाहर निकालते हैं इस पूरी प्रक्रिया को प्रकाश संश्लेषण कहते हैं .प्रकाश संश्लेषण प्रक्रिया में कार्बन डाइऑक्साइड ली जाती है और ऑक्सीजन निकाली जाती है इससे कार्बन डाइऑक्साइड और ऑक्सीजन की मात्रा वातावरण में संतुलित बनी रहती है और इस प्रक्रिया द्वारा कार्बन डाइऑक्साइड का प्रदूषण भी कम हो जाता है. इस प्रक्रिया द्वारा बनाई गई ऑक्सीजन का इस्तेमाल हर एक जीवित प्राणी सांस लेने के लिए करता है इसीलिए प्रकाश संश्लेषण की प्रक्रिया पौधों के साथ-साथ हर एक जीवित प्राणी के लिए भी महत्वपूर्ण है.

Image source : Wikipedia.org
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प्रकाश संश्लेषण की अभिक्रिया

6 CO2 + 12 H2O + प्रकाश + क्लोरोफिल → C6H12O6 + 6 O2 + 6 H2O + क्लोरोफिल

पतियों के ऊपर जो रेखाएं दिखाई देती है. उनको मोटी रेखाओं को Main Vein कहते हैं तथा पतली और छोटी रेखाओं को sub veins कहते हैं और यह रेखाए पत्तियों तक पानी पहुंचाने का काम करती है.

पत्तियां हरे रंग की क्यों होती है. क्योंकि पत्तियों में हरे रंग का एक द्रव्य होता है. जिसे क्लोरोफिल कहते हैं और यही द्रव्य पतियों को हरा रंग देता है. और पत्तियों के अंदर छोटे छोटे छेद होते हैं जिसे Stomata कहते हैं और हवा पौधों के अंदर इन्हीं छेदों के द्वारा जाती है. और यही छेदों से बाहर भी निकलती है.

पौधे की जड़ें पानी और खनिज को खींचकर पौधे की अन्य भागों तक पहुंचाती है. फिर तना उन तत्वों को पतियों तक पहुंचाता है. फिर पतियों की छोटी और बड़ी रेखाएं होती है. वह मिलकर पतियों के अन्य भागों तक पहुंचाने का काम करती है. सूरज की गर्मी पत्तियों के अंदर क्लोरोफिल को पकड़ लेती है. और कार्बन डाइऑक्साइड हवा के माध्यम से पत्तियों के छेदों में जाती है. और सूरज की एनर्जी के माध्यम से पानी और कार्बन डाइऑक्साइड को अपने खाने में बदल देती है.

फिर उनमें से एक गैस निकलती है. जिसका नाम है. ऑक्सीजन और फिर पका हुआ खाना पौधे के हर भाग में भेजा जाता है. सूरज की एनर्जी पत्तियों के अंदर क्लोरोफिल को कैद कर लेता है. कार्बन डाइऑक्साइड हवा के द्वारा पत्तियों के छेद से अंदर आती है. और ऑक्सीजन इन छेदों से बाहर जाती है. पत्तियां पौधे का रसोई घर मानी जाती है. और क्लोरोफिल को पौधों का रसोईया भी कहा जाता है. सूरज की एनर्जी लेकर पौधे पानी और कार्बन डाइऑक्साइड को अपने खाने में बदल देते हैं जिसे ग्लूकोस कहते हैं और फिर और ऑक्सीजन को छोड़ देते हैं कुछ खाना पौधे अपने विकास के लिए प्रयोग करते हैं और बचे हुए खाने को स्टार्च में परिवर्तित कर के पौधों की अलग-अलग भागों में रखा जाता है.

कुछ पौधों में जैसे आम में यह खाना उसके फल में रखा जाता है. और गाजर में यह खाना के उसकी जड़ में रखा जाता है. और कहीं कहीं यह खाना फलों के बीज और पत्तियों में भी रखा जाता है. जो इंसान और जानवरों के खाने के काम आता है. और फलों के अलावा भी पौधे हमें ऑक्सीजन भी देते हैं जिसे सांस लेकर हम जीवित रहते हैं पौधे और इंसान एक दूसरे पर निर्भर होते हैं

Fungi एक ऐसा पौधा होता है. जो अपना खाना नहीं बना सकता और वह मरे हुए जीव जंतुओं और पौधों पर निर्भर करता है. और इनमें से कुछ Fungi हमारे काम में आती है. जैसे कुछ दवाइयां बनाने के लिए और इनमें से कुछ Fungi जहरीला और खतरनाक होती है.

प्रकाश संश्लेषण प्रक्रिया में प्रभावित होने वाले कारक

जैसा कि आपको पता है प्रकाश संश्लेषण के लिए किसी एक कारक से अभिक्रिया पूरी नहीं हो सकती इसके लिए अलग अलग कारको की आवश्यकता होती है. जैसे कि प्रकाश कार्बन डाइऑक्साइड पानी ऑक्सीजन और तापमान इत्यादि इन सभी कारको के आपस में मिलने पर यह प्रक्रिया पूरी होती है.

कार्बन डाइऑक्साइड (Co2) : इस प्रक्रिया में सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण कारक कार्बन डाइऑक्साइड होता है वैसे तो वातावरण में कार्बन डाई ऑक्साइड की मात्रा 0.03% होती है.लेकिन प्रकाश संश्लेषण क्रिया के लिए यह कार्बन डाइऑक्साइड बहुत जरूरी होती है.

प्रकाश : प्रकाश संश्लेषण क्रिया के लिए सूर्य के प्रकाश की आवश्यकता होती है और सूर्य का प्रकाश इस क्रिया को बहुत ज्यादा प्रभावित करता है .सूर्य के प्रकाश की तीव्रता ज्यादा होने पर यह प्रक्रिया बढ़ जाती है. और अगर सूर्य की प्रकाश की तीव्रता अत्यधिक ज्यादा हो जाए तो यह प्रक्रिया रुक जाती है.

तापमान : प्रकाश संश्लेषण क्रिया में तापमान की भी अहम भूमिका होती है इस प्रक्रिया के लिए 25 से 35 डिग्री सेल्सियस तापमान उपयुक्त होता है अगर तापमान बढ़ता है या घटता है तो यह प्रक्रिया की दर बढती और घटती है.

पानी : इस प्रक्रिया में पानी भी एक महत्वपूर्ण होता है अगर इस प्रक्रिया के दौरान पानी की कमी हो जाए तो ज्यादा प्रभावित हो जाती है अगर पानी की मात्रा कम होती है तो स्टोमेटा बंद हो जाता है और प्रकाश संश्लेषण की क्रिया कम हो जाती है.

ऑक्सीजन : इस प्रक्रिया के दौरान कार्बन डाइऑक्साइड दी जाती है और ऑक्सीजन दी जाती है प्रकाश संश्लेषण प्रक्रिया के द्वारा वायुमंडल में ऑक्सीजन की मात्रा को बढ़ाया जाता है लेकिन अगर ऑक्सीजन की मात्रा बढ़ जाए तो प्रकाश संश्लेषण की प्रक्रिया कम हो जाती है.

इस पोस्ट में आपको प्रकाश संश्लेषण का महत्व प्रकाश संश्लेषण की अभिक्रिया प्रकाश संश्लेषण का सूत्र प्रकाश संश्लेषण को प्रभावित करने वाले कारक प्रकाश संश्लेषण कब होता है से संबंधित पूरी जानकारी देने की कोशिश की है अगर इसके अलावा आपका कोई भी सवाल या सुझाव है तो नीचे कमेंट करके जरूर बताएं और अगर आपको यह जानकारी फायदेमंद लगे तो अपने दोस्तों के साथ शेयर जरूर करें.

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