सत्यमेव जयते प्रतीक चिह्न कहाँ से लिया गया ?

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Prashn Patr Staff asked 1 month ago

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Prashn Patr Staff answered 2 years ago

हमारे देश का प्रतीक चिह्न चार शेरों वाली प्रतिमा है जो अशोक स्तम्भ के शिखर पर लगी थी। इसे ईसवी सन शुरू होने के 250 साल पहले सम्राट अशोक ने बनवाया था। यह स्तम्भ सारनाथ में आज भी खड़ा है और प्रतिमा सारनाथ के संग्रहालय में रखी है। इन चारों शेरों के नीचे एक घेरे में एक हाथी, एक घोड़ा और एक नन्दी है। इसके बीच में धर्मचक्र है। इसके नीचे लिखा है सत्यमेव जयते, जो मुंडक उपनिषद से लिया गया है। इसे हमारे तमाम शासकीय कार्यों में इस्तेमाल किया जाता है। उसमें स्थित धर्मचक्र हमारे तिरंगे झंडे के बीच में लगाया गया है। हर देश का कोई न कोई प्रतीक चिह्न होता है। हमारा प्रतीक चिह्न हमारे गौरवपूर्ण अतीत की कहानी कहता है।

सत्यमेव जयते भारत का ‘राष्ट्रीय आदर्श वाक्य’ है, जिसका अर्थ है- “सत्य की सदैव ही विजय होती है”। यह भारत के राष्ट्रीय प्रतीक के नीचे देवनागरी लिपि में अंकित है।

सम्पूर्ण भारत का आदर्श वाक्य ‘सत्यमेव जयते’ उत्तर भारतीय राज्य उत्तर प्रदेश के वाराणसी के निकट स्थित सारनाथ में 250 ई. पू. में मौर्य सम्राट अशोक द्वारा बनवाये गए सिंह स्तम्भ के शिखर से लिया गया है, किंतु इस शिखर में यह आदर्श वाक्य नहीं है। ‘सत्यमेव जयते’ मूलतः ‘मुण्डकोपनिषद’ का सर्वज्ञात मंत्र है। ‘मुण्डकोपनिषद’ के निम्न श्लोक से ‘सत्यमेव जयते’ लिया गया है-