मेरे संग की औरतें पाठ के आधार पर बताएं कि क्या पहले की औरतों को अपने ढंग से जीने की आज़ादी थी ?

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प्रश्न Staff asked 1 month ago

मेरे संग की औरतें पाठ के आधार पर बताएं कि क्या पहले की औरतों को अपने ढंग से जीने की आज़ादी थी ?

1 Answers
Prashn Patr Staff answered 1 month ago

लेखिका के जीवन में उसकी माँ, नानी, परदादी और दादी आदि सभी औरतों का बहुत प्रभाव था। सभी औरतों ने अपने जीवन को अपने ढंग से व्यतीत किया है। लेखिका की नानी ने विलायती स्वभाव वाले पति के साथ रहकर अपनी स्वतंत्रता को नहीं खोया । इसलिए अपने अंतिम समय में अपनी निजी स्वतंत्रता का उपयोग करते हुए अपनी बेटी की शादी का दायित्व अपने पति के स्वतंत्रता सेनानी मित्र को सौंप दिया। लेखिका की परदादी भी अलग तरह के विचारों पर चलने वाली औरत थी। इसलिए उन्होंने अपनी पतोहू से पहले बच्चे के रूप में लड़की की मांग रख दी। इसके लिए उन्होंने भगवान् से प्रतिदिन प्रार्थनाएं कीं। इस प्रकार लगातार पाँच बहनें पैदा हुईं। इसके लिए कभी भी उन्हें या उनकी माँ को सुनना नहीं पड़ा।
लेखिका की माँ ने भी अपनी जिंदगी अपने विचारों के अनुरूप व्यतीत की है। उन्होंने कभी भी किसी के काम में हस्ताक्षेप नहीं किया। संयुक्त परिवार में रहते हुए भी सभी को अपनी निजी स्वतंत्रता बनाए रखने की छूट थी। उनकी दादी ने भी कभी भी उनकी माँ के निजी जीवन में हस्ताक्षेप नहीं किया था। इस प्रकार लेखिका के घर की औरतें को अपना जीवन स्वतंत्रता से व्यतीत करनी की आजादी थी।

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