गुरुदेव मैना के मनोभावों को कैसे जान सके ?

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प्रश्न Staff asked 2 months ago

गुरुदेव मैना के मनोभावों को कैसे जान सके ?गुरुदेव ने शांतिनिकेतन को छोड़ कहीं और रहने का मन क्यों बनाया गुरुदेव द्वारा मैना को लक्ष्य करके लिखी कविता के मर्म को लेखक कब

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Prashn Patr Staff answered 2 months ago

गुरुदेव की संवेदनशील दृष्टि एक-एक वस्तु, पशु-पक्षी सब पर रहती थी। यहाँ तक कि आश्रम में कौवे न रहने पर भी उन्हें यह पता चल जाता था कि वे प्रवास पर गये हैं। इसी प्रकार जब लेखक गुरुदेव के पास उपस्थित था तो उनके सामने एक लंगड़ी मैना फुदक रही थी। गुरुदेव को प्रत्येक वस्तु का इतना ध्यान रहता था कि अपने समूह से बिछुड़ी हुई मैना के फुदकने में उसके अंतर में छिपे करुण भाव का ज्ञान हो गया और उन्होंने उसकी चर्चा की। इसके पूर्व विवेदी जी यही जानते थे कि मैना में करुणा का भाव नहीं होता है। वह दूसरों पर कृपा ही किया करती है किंतु गुरुदेव की बात से उन्हें ज्ञात हुआ कि मैना में भी करुणा होती है। द्विवेदी जी और गुरुदेव दोनों के विचार मैना के विषय में भिन्न थे क्योंकि कवि होने के नाते उनमें संवेदनशीलता अधिक थी। अतः वह मैना के मनोभाव को अधिक निकट से जान सके थे।

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