लोकतंत्र की चुनौतियाँ Class 10th Political Science Chapter 8. Solution

लोकतंत्र की चुनौतियाँ Class 10th Political Science Chapter 8. Solution

NCERT Solutions For Political Science Class 10th Ch. 8 लोकतंत्र की चुनौतियाँ – हर विद्यार्थी का सपना होता है कि वे अपनी में अच्छे अंक से पास हो ,ताकि उन्हें आगे एडमिशन या किसी नौकरी के लिए फॉर्म अप्लाई करने में कोई दिक्कत न आए . जो विद्यार्थी 10th कक्षा में पढ़ रहे है उनके लिए यहां पर एनसीईआरटी कक्षा 10th विज्ञान अध्याय 8 (लोकतंत्र की चुनौतियाँ ) के लिए सलूशन दिया गया है.जोकि एक सरल भाषा में दिया है .क्योंकि किताब से कई बार विद्यार्थी को प्रश्न समझ में नही आते .इसलिए यहाँ NCERT Solutions For Class 10th Chapter 8. Challenges To Democracy दिया गया है वह आसन भाषा में दिया है .ताकि विद्यार्थी को पढने में कोई दिक्कत न आए . इसकी मदद से आप अपनी परीक्षा में अछे अंक प्राप्त कर सकते है. इसलिए आप Ch 8 लोकतंत्र की चुनौतियाँ के प्रश्न उत्तरों ध्यान से पढिए ,यह आपके लिए फायदेमंद होंगे

अति लघु-उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1. ‘चुनौती’ का अर्थ स्पष्ट कीजिए।

उत्तर-  साधारणतया उन समस्याओं को चुनौतियाँ कहा जाता है जो काफ़ी महत्त्वपूर्ण होती हैं तथा जिन्हें दूर किया जाना चाहिए। इसमें प्रगति के बहत अवसर होते हैं क्योंकि इसमें अपने साथ ही एक मौका होता है। हम समस्याओं को दूर करके ही उच्च स्तर पर जा सकते हैं।

प्रश्न 2. भारतीय लोकतंत्र को आजकल किन चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है?

उत्तर-  भारतीय लोकतंत्र संसार का सबसे बड़ा लोकतंत्र है क्योंकि इसमें सबसे अधिक लोग अपने मत देने के अधिकार का प्रयोग करते हैं। परंतु लोकतंत्र को आजकल कई चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। जैसे कि जातिवाद, सांप्रदायिकता, निर्धनता, क्षेत्रवाद, जातीय भेदभाव इत्यादि।

प्रश्न 3. सांप्रदायिकता का क्या अर्थ है?

उत्तर-  सांप्रदायिकता एक विचार है जिसमें व्यक्ति अपने धर्म से लोगों को अपना दोस्त तथा और धर्मों के लोगों को अपना दुश्मन समझता है। इसका अर्थ है कि किसी विशेष धर्म के विचारों का प्रचार करना इस विचार के साथ कि समाज को धार्मिक आधार पर बाँटना है।

प्रश्न 4. हम कैसे कह सकते हैं कि सांप्रदायिकता लोकतंत्र के विरुद्ध है?

उत्तर-  सांप्रदायिकता अलग-अलग धर्मों के लोगों के बीच नफ़रत की भावना उत्पन्न करती है। व्यक्ति यह सोचता है कि उसका धर्म और धर्मों से ऊँचा है। यही विचार लोकतंत्र के विरुदध है। इस प्रकार सांप्रदायिकता लोकतंत्र के विरुद्ध है।

प्रश्न 5.आर्थिक असमानता का क्या अर्थ है?

उत्तर-  वह विचार जिसमें समाज के कुछ व्यक्ति अमीर होते हैं तथा कुछ व्यक्ति ग़रीब होते हैं, आर्थिक असमानता कहलाता है। संपदा का गलत वितरण समाज में आर्थिक असमानता का कारण होता है।

प्रश्न 6. समाज में से आर्थिक असमानता को कैसे कम किया जा सकता है?

उत्तर-  समाज में से आर्थिक असमानता को कई ढंगों से दूर किया जा सकता है। संपदा अथवा उत्पादन के साधन कुछ ही हाथों में केंद्रित नहीं होने चाहिएं बल्कि हरेक व्यक्ति को इसमें समान हिस्सा मिलना चाहिए। वितरण-व्यवस्था ठीक होनी चाहिए। अमीर लोगों को अधिक टैक्स देना चाहिए तथा उनकी संपदा को जनता के कल्याण के लिए प्रयोग करना चाहिए।

प्रश्न 7. आधारभूत चुनौतियाँ लोकतंत्र में किस प्रकार परिवर्तन लाती हैं?

उत्तर-  आजकल के समय में संसार के लगभग एक चौथाई देशों में लोकतांत्रिक सरकार नहीं है। इन देशों को लोकतंत्र में परिवर्तन की आधारभूत चुनौती का सामना करना पड़ रहा है। अगर स्वायत्त तथा कार्यात्मक सरकार को स्थापित किया जाए, अलोकतांत्रिक सरकार को हटा दिया जाए तथा अगर सेना को शासन से दूर रखा जाए तो यह मुमकिन है।

प्रश्न 8. राजनीतिक सुधार अथवा लोकतांत्रिक सुधार का क्या अर्थ है ?

उत्तर-  जब लोकतंत्र की अलग-अलग चुनौतियों को दूर करने के लिए कुछ सुझाव सामने आएं तो इन सुझावों को राजनीतिक सुधारों अथवा लोकतांत्रिक सुधारों का नाम दिया जाता है।

प्रश्न 9. भारतीय लोकतंत्र को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए एक सुधार बताइए।

उत्तर-  लोकतंत्र को प्रभावशाली बनाने के लिए कुछ कानूनों का निर्माण करना चाहिए। अगर कानूनों में परिवर्तन करके उन्हें अच्छे ढंग से लागू किया जाए तो भारतीय लोकतंत्र को अधिक प्रभावशाली बनाया जा सकता है।

प्रश्न 10. लोकतांत्रिक सुधारों को वैध करने का तरीका बताएँ।

उत्तर-  सवैधानिक संशोधन कर, तथा समाज में प्रचलित कुप्रथाओं का खात्मा कर हम लोकतांत्रिक सुधारों को वैध कर सकते हैं।

प्रश्न 11. भारत में बढ़ रही गरीबी के दो उत्तरदाई कारण बताएँ।

उत्तर-  (क) जनसंख्या में निरंतर बढ़ोतरी (ख) बेरोजगारी

प्रश्न 12. लोकतंत्र के विकास में सबसे प्रमुख दो बाधाएँ कौन-कौन सी है।

उत्तर-  (क) जातिवाद (ख) अर्थिक असमानताएँ (ग) समप्रदायिकतावाद (कोई दो)

प्रश्न 13. क्षेत्रीयवाद से आपका क्या अर्थ है ?

उत्तर-  क्षेत्रीयवाद एक ऐसी राजनीतिक भावना है जिसके चलते किसी ख़ास क्षेत्र के लोग आपनी भाषा, धर्म, सामाजिक तथा आर्थिक विकास के और अधिक प्रयत्नशील रहते हैं।

प्रश्न 14. विस्तार की चुनौती क्या है?

उत्तर-  विस्तार की चुनौती से अभिप्राय उस लोकतांत्रिक चुनौती से है जिसका सामना विश्व के अधिकांश स्थापित लोकतात्रिक शासन के सभी मूल भूत सिद्धांतों सभी क्षेत्र, सामाजिक समूहों तथा अलग-अलग संस्थाओं में लागू करना पड़ता है।

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