मुहावरे और लोकोक्तियाँ किसे कहते है

मुहावरे और लोकोक्तियाँ किसे कहते है

जब कोई वाक्य या वाक्यांश अपने साधारण अर्थ को छोडकर विशेष अर्थ प्रकट करे तो उसे मुहावरा कहा जाता है. और मुहावरा वाक्यांश है और इसका स्वतंत्र रूप से प्रयोग नहीं किया जा सकता.

    1. अधें की लकड़ी – ( एक मात्र सहरा ) – मुकेश ही बुढ़ापे में मुझ अंधे की लकड़ी है
    2. अंग – अंग ढीला होना – ( थक जाना ) – दिन भर काम करने से मजदूर का अंग – अंग ढीला हो जाता है
    3. अंगूठा दिखाना – ( विश्वास दिलाकर मौके पर इंकार कर देना ) – नेता लोग चुनाव के दिनों में अनेक वायदे करते , परन्तु बाद में अंगूठा देखा देते है
    4. अपनी खिचड़ी अलग पकाना – ( सबसे अलग रहना ) – सबके साथ मिलकर रहना चाहिए , अपनी खिचड़ी अलग पकाने से कोई लाभ नहीं
    5. अंगुली उठाना – ( दोष लगाना ) – कर्त्तव्य का पालन करने वाले व्यक्ति पर कोई अंगुली नहीं उठा सकता
    6. आग बबूला होना – ( बहुत क्रोधित होना ) – मोहन की खरी खोटी बात सुनकर राकेश आग बबूला हो गया
    7. आँखों का तारा – ( बहुत प्यारा ) – मोहन अपने माता पिता का आँखों का तारा है
    8. आस्तीन का सांप – ( धोखेबाज ) – अरे विकाश उसकी बातो में मत आना वह तो निरा आस्तीन का सांप है
    9. इधर – उधर की हांकना – ( व्यर्थ गप्पे मरना ) – सदन सदैव इधर – उधर की हांकता रहता है
    10. उलटी गंगा बहना – ( उलटी बातें होना ) – आजकल माता पिता बच्चों से डरने लगे है अब उलटी गंगा भ रही है
    11. उन्नीस बीस का अंतर – ( बहुत कम अंतर ) – राकेश तथा सदन में उन्नीस बीस का अंतर है
    12. कलम तोडना – ( बहुत सुंदर लिखना ) – जयशंकर प्रसाद ने ‘ कामायनी ‘ लिखने में कलम तोड़ दी
    13. काम तमाम करना – ( मार देना ) – तलवार के एक ही वार से मोहन ने अपने सत्रु का काम तमाम कर दिया
    14. कान पर जूं न रेंगना – ( कुछ असर न होना ) – में विकाश को समझाकर हार गया हूँ लेकिन उसके कान पर जूं तक नहीं रेंगती
    15. खून खौलना – ( जोश आना ) – शत्रुओं की टुकड़ी देखकर भारतीय जवानों का खून खौल उठा
    16. खून का प्यासा – ( कट्टर शत्रु ) – आज भाई – भाई खून का प्यासा बन गया है
    17. खून पिसना एक करना – ( बहुत परिश्रम करना ) – मोहन के पिता जी उसकी पढ़ाई के लिए खून पसीना एक करते है
    18. गले का हार – ( बहुत प्रिय ) – प्रियंका इकलोती बेटी होने के कारण अपने माता पिता के गले का हार है
    19. घी के दिये जलाना – ( प्रसन्न होना ) – जब श्री राम जी अयोध्या में वापस पहुचें तो लोगों ने घी के दिये जलाये थे
    20. चमका देना – ( धोखा देना ) – डाकू पुलिस चकमा देकर भाग गया
    21. छक्के छुड़ाना – ( बुरी तरह हरना ) – युद्ध में भारतीय सेना ने पाकिस्तान के छक्के छुड़ा दिये
    22. जी चुरना – ( परिश्रम से भागना ) – अच्छे विद्यार्थी कभी पढ़ाई से जी नहीं चुराते
    23. डंका बजाना – ( विजय पाना ) – सारे विश्व में अमेरिका की शक्ति का डंका बज रहा है
    24. थाह लेना – ( पता लगाना ) – किसी के दिल की थाह लेना बहुत कठिन काम है
    25. दम घुटना – ( श्वास लेने में कठिनाई होना ) – आजकल यात्रा के समय इतनी भीड़ का सामना करना पड़ता है कि कई बार दम घुटने लगता है
    26. दंग रह जाना – ( हैरान रह जाना ) – सदन के द्वारा चोरी किए जाने का समाचार सुनकर सभी दंग रह गए
    27. दाल में काला – ( कुछ गडबड ) – आजकल वह तुम्हारे घर के बड़े चक्कर लगा रहा है मुझे तो कुछ दाल में काला लगता है
    28. नानी याद आना – ( घबराना ) – कड़ी मंहगाई में सब को नानी याद आने लगती है
    29. नाकों चने चबाना – ( खूब तंग करना ) – सुभाष चन्द्र बोस जैसे वीरो ने अंग्रेजी सेना के टक्कर लेकर उनको नाकों चने चबा दिए
    30. नीचा दिखाना – ( हराना ) – पकिस्तान सदैव भारत को नीचा दिखने की ताक में रहता है
    31. नौ दो ग्यारह होना – ( भाग जाना ) – पुलिस को देखते ही चोर नौ दो ग्यारह हो गया
    32. पगड़ी उछलना – ( अपमान करना ) – बड़ो की पगड़ी उछालना सज्जन पुरुषो को शोभा नहीं देता
    33. पानी फेर देना – ( नाश कर देना ) – पुत्र ने फेल होकर अपने माता पिता की सब आशाओं पर पानी फेर दिया
    34. पानी – पानी होना – ( बहुत लज्जित होना ) – मेरे द्वारा सच्ची बात कहने पर सुनील पानी – पानी हो गया
    35. बगुला भगत – ( कपटी ) – सोहन को अपनी कोई बात न बताना वह तो धोखा देने वाला बगला भगत है
    36. मैदान मारना – ( जीतना ) – भारतीय सेना ने देखते ही देखते छंब में मैदान मार लिया
    37. रंग उड़ना – ( डर जाना ) – शेर को देखते ही दोनों मित्रों का रंग उड़ गया
    38. रंग में भंग पड़ना – ( मजा किरकिरा होना ) – जलसा शुरू हुआ था कि रंग में भंग पड़ गया
    39. लोहे के चने चबाना – ( अति कठिन काम ) – भारत पर आक्रमण करके पाकिस्तान को लोहे के चने चबाने पड़े
    40. लहू पिसना एक करना – ( बहुत परिश्रम करना ) – आजकल अच्छी तरह काम करने के लिए लहू पिसना एक करना पड़ता है
    41. सिक्का जमाना – ( धाक बैठाना ) – रंजित सिंह ने शीघ्र ही अपनी वीरता का सिक्का अन्य राजाओं पर जमा लिया था
    42. हक्का बक्का रह जाना – ( हैरान रह जाना ) – में सरोज की हालत को देखकर हक्का बक्का रह गया
    43. हवा हो जाना – ( भाग जाना ) – सिपाही को अपनी तरफ देखकर चोर हवा हो गया
    44. हाथ तंग होना – ( पैसे की कमी होना ) – हमारा आजकल हाथ बहुत तंग है कृपया नकद रुपया दे
    45. हाथ दिखाना – ( बहादुरी दिखाना ) – युद्ध में हमारे सैनिकों के हाथ देखकर शत्रु की सेना मुसीबत में पड़ गई
    46. हाथ मलना – ( पछताना ) – अब फेल होने पर हाथ मलने से क्या लाभ है पहले डट कर परिश्रम करते
    47. हाथ पाँव फूलना – ( डर से घबरा जाना ) पुलिस को अपने घर आया देख कर उसके हाथ पाँव फूल गए
    48. हाथ खींचना – ( सहायता बंद करना ) जहां तक हो सके निर्धनों की सहायता करो उनसे हाथ खींचना अच्छी बात
    49. हाथ रंगना – ( खूब धन कमाना ) महंगाई में जमाखोर व्यापारी खूब हाथ रंगते
    50. हाथ पैर मारना – ( कोशिश करना ) वह सफलता प्राप्त करने के लिए हाथ पैर मार रहा है

लोकोक्तियाँ क्या होती है

लोकोक्तियाँ – ऐसी प्रचलित उक्तियाँ जो अपने विशेष अर्थों में किसी सच्चाई को प्रकट करती है उन्हें लोकोक्तियाँ कहते है लोकोतियाँ शब्द दो शब्दों के योग से बना है – लोक + उक्ति , लोक का अर्थ है – संसार के लोग तथा उक्ति का अर्थ है – कथन |

  1. अंधेर नगरी चौपट राजा टके सेर भाजी टके सेर खाजा – ( अयोग्य प्रशासन में धाधली रहती है ) – मिल मालिक विलास में मस्त रहते है , श्रमिक मौज मारते है इसी को कहते है – अंधेर नगरी चौपट राजा टके सेर भाजी टके सेर खाजा
  2. अपनी –अपनी डफली अपना – अपना राग – ( जब सब लोग अलग – अलग व्यवहार करें तब ऐसा कहा जाता है ) – वहाँ तो सबकी अपनी – अपनी डफली अपना – अपना राग था , इकट्ठे मिलकर किसी ने भी समस्या पर विचार नही किया
  3. अंधा क्या चाहे दो आँखे – ( मनचाही वस्तु प्राप्त होने पर क्या चाहिए ) – जब मेने उसे चलचित्र देखने के लिए चलने को कहा तो वह प्रसन्नता से झूम उठा और कहने लगा – अँधा क्या चाहे दो आँखे
  4. आँख का अँधा गाँठ का पूरा – ( मुर्ख किंतु धनी ) – रमेश के पास अक्ल कुछ भी नहीं है लेकिन उसकी दुकान में आमदनी बहुत है यह तो यही बात हुई है कि आँख का अँधा गाँठ का पूरा
  5. आम के आम गुठलियों के दाम – ( दोहरा लाभ ) – आजकल तो अख़बार की रद्दी भी अच्छे भाव पर बिक जाती है यह तो आम के आम गुठलियों के दाम वाली बात है
  6. आसमान से गिरा खुजर में अटका – ( एक विपत्ति से छुटकर दूसरी में फंस जाना ) – वह पुलिस के पंजे से छुटा ही था कि कर – विभाग के चुंगल में फंस गया , उसके लिए तो यह आकाश से गिरा और खजूर में अटका वाली बात हो गई
  7. अकेला चना भाड़ नहीं फोड़ सकता – ( एक व्यक्ति कोई बड़ा कार्य नहीं कर सकता ) – तुम अकेले उस संस्था का कार्य नहीं सभाल सकते , क्या तुम नही जानते कि अकेला चना भाड़ नहीं फोड़ सकता
  8. एक अनार सौ बीमार – ( वस्तु कम चाहने वाले अधिक ) – यदि किसी कार्यालय में एक स्थान की रिक्ति होती है तो उसकी पूर्ति के लिए सैकड़ो प्रार्थना पत्र आते है , इसी को कहते है एक अनार सौ बीमार
  9. एक हाथ से ताली नहीं बजती – ( झगड़ा दोनों तरफ के ही कारण होता है ) – रमेश से जरुर तुमने पहले कुछ कहा होगा , इसलिए उसने तुम्हें चाटा मारा क्योंकि एक हाथ से ताली नहीं बजती
  10. एक पंथ दो काज – ( एक उपाय से दो कार्य होना ) – भैया हरिद्वार में नौकरी करते है वहाँ जाकर भैया से भी मिल लेंगे और गंगा स्नान भी कर लेंगे इसे कहते है एक पंथ दो काज
  11. अंधी पिसे कुत्ता खाए – ( मुर्ख की कमाई दुसरे खाते है ) – सुनील कमाई तो बहुत कर रहा है लेकिन इधर – उधर के झगड़ो में सारी कमाई वकीलों पर खर्च कर रहा है , सत्य ही कहा गया है कि अँधा पिसे कुत्ता खाए
  12. देखें ऊंट किस करवट बैठता है – ( देखें क्या परिणाम निकलता है ) – परीक्षा के पेपर तो अच्छे हो गए है , देखें ऊंट किस करवट बैठता है
  13. नया नौ दिन पुरना सौ दिन – ( नए की अपेक्षा पुराना स्थिर है ) – तुम अपने विश्वास – पात्र मित्रों को छोड़कर नए के पीछे मत भागो , क्या तुम्हे मालूम नहीं नया नौ दिन पुराना सौ दिन
  14. नाम बड़े दर्शन छोटे – ( प्रसिद्धि अधिक किंतु तत्व कुछ भी नहीं ) – उस विद्यालय की प्रसिद्धि तो बहुत सुन रखी थी पर पढ़ाई कुछ भी नहीं , इसी को कहते है नाम बड़े दर्शन छोटे
  15. नाच न जाने आंगन टेढ़ा – ( गुण न होने पर बहाने बनाना ) – अरे तुम्हे सिलाई करनी तो आती नहीं और दोष निकाल रही हो कपड़े में , इसी को कहते है नाच न जाने आंगन टेढ़ा
  16. नौ नकद न तेरह उधार – ( उधार के अधिक की अपेक्षा नकद का थोड़ा अच्छा रहता है ) – जो व्यापारी नौ नकद न तेरह उधार वाली नीति पर चलते है , वे कभी आर्थिक संकट का सामना नहीं करते
  17. बंदर क्या जाने अदरक का स्वाद – ( मुर्ख व्यक्ति वस्तु के गुणों को नहीं पहचानता ) – तुम उस मुर्ख को इत्र दिखा रहे हो , भला वह इत्र का मूल्य क्या जाने | क्या तुम नहीं जानते कि बंदर क्या जाने अदरक का स्वाद
  18. बिल्ली के भागों छींका टुटा – ( अचानक कोई लाभ होना ) – वर्षा में वह दिवार जिसे आप गिरना चाहते थे , अपने आप गिर पड़ी , यही है बिल्ली के भागो छींका टूटा
  19. लातों के भुत बातों से नहीं मानते – ( बुरे व्यक्ति मार खाए बिना सीधे नही होते ) – रामचंद्र ने रावण से सीता को छोड़ने के लिए कई संदेश भेजे लेकिन वह नहीं माना और अंत में रामचन्द्रजी को युद्ध करना पड़ा | ठीक ही कहा है – लातों के भुत बातों से नहीं मानते
  20. सहज पके सो मीठा होय – ( धीरे – धीरे किया जाने वाला काम फलदायक होता है ) – अरे महेश पेपर की शुरू से तैयारी करोगें तब ही प्रथम स्थान प्राप्त कर सकोगें , क्योंकि सहज पके सो मीठा होय
  21. हंसा थे सो उड़ गए कागा भए दीवान – ( योग्य व्यक्ति के स्थान पर अयोग्य व्यक्तियों का आ जाना ) – पहले के नेता वास्तव में बड़े नैतिक थे , परन्तु अब तो मामला उल्टा है , हंसा थे सो उड़ गए कागा भए दीवान .
  22. हाथी के दांत खाने के और दिखाने के और – ( कहना कुछ और करना कुछ और ) – आजकल के समाज सुधारक , दहेज – प्रथा के विरुद्ध बहुत – से भाषण देते है , लेकिन खुद दहेज के लालची है | कहा भी है – हाथी के दांत खाने के और दिखाने के और
  23. हथेली पर सरसों नहीं जमती – ( जल्दी में कोई काम नहीं बनता ) – काम करने में कुछ समय लगता है , अधिक जल्दी में हो तो कोई दूसरी दुकान देख लो , हथेली पर सरसों नहीं जमती
  24. हाथ कंगन को आरसी क्या – ( दूसरो की प्रमाण की आवश्यकता नहीं ) – आप मेरी बात का विश्वास नहीं करते , लीजिए समाचार पत्र पढ़कर मनोगें , हाथ कंगन को आरसी क्या |

मुहावरा और लोकोक्ति में अंतर- मुहावरा वाक्यांश है और इसका स्वतंत्र रूप से प्रयोग नहीं किया जा सकता। लोकोक्ति संपूर्ण वाक्य है और इसका प्रयोग स्वतंत्र रूप से किया जा सकता है.

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मुहावरे और लोकोक्तियाँ
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