क्रिया किसे कहते है क्रिया के उदाहरण

क्रिया किसे कहते है क्रिया के उदाहरण

जिस शब्द से किसी काम का होना या करना पाया जाए , उसे क्रिया कहते है जैसे –
1. मोहन पढ़ता है
2. कमला लिखती है
3. सोहन जा रहा है
4. राजेश गाना गा रहा है
5. भगत सिंह बड़े वीर थे
6. सरोज खाना खा रही है
इन वाक्यों में पढ़ता है, लिखता है ,जा रहा है,गा रहा है और खा रही है यह सभी शब्द से किसी कार्य के करने अथवा होने का पता चलता है|इसे क्रिया कहते है

धातु – यदि किसी क्रिया के विभिन्न रूपों को देखा जाए ;जैसे – करेगा ,कर रहा है ,कर चुका ,कर लेगा ,करता है ,होगा करना चाहिए ,करो करवाइए आदि इन सब क्रिया में कर ऐसा अंश है जो सभी क्रिया रूपों में समान रूप से आ रहा है |इस समान रूप से मिलने वाले अंश को ही क्रिया की धातु कहा जाता है.

क्रिया के दो प्रकार है
1. सकर्मक क्रिया
2. अकर्मक क्रिया

1. सकर्मक क्रिया

वह क्रिया जो वाक्य में कर्म की अपेक्षा करती अर्थात जिस क्रिया के प्रयोग में कर्म की आवश्यकता पडती है उसे सकर्मक क्रिया कहते है दूसरे शब्दों में जिस क्रिया के व्यापार का फल कर्म पर पड़ता है उसे सकर्मक क्रिया कहते है जैसे –
सुनील पत्र लिखता है
1. मोहन भागता है
2. विनोद खाना खाएगा
3. टिंकू ने दूध पिया है
4. सरोज पुस्तक लाती है
इन वाक्यों में लिखता,भागता,खाएगा,पिया,तथा लाती इन शब्दों को सकर्मक क्रिया कहते है
सकर्मक क्रिया तीन तरह की होती है

1. पूर्ण एककर्मक सकर्मक क्रियाएँ
2. पूर्ण द्विकर्मक सकर्मक क्रियाएँ
3. अपूर्ण सकर्मक क्रियाएँ

2. अकर्मक क्रिया

जिस क्रिया में कर्म की आवश्यकता नहीं होती अर्थात दूसरे शब्दों में जिस क्रिया के फल और व्यापार दोनों में कर्ता रहते है , उसे अकर्मक क्रिया कहते है अर्थात जिस क्रिया में कर्म की अपेक्षा नहीं रखती है जैसे –
1. सोहन हँसता है
2. राम सोता है
3. गाड़ी चलती है
4. राहुल दौड़ता है
इन वाक्यों में हँसता ,सोता,चलती,और दौड़ता आदि अकर्मक क्रिया है
अकर्मक क्रियाएँ तीन तरह की है
1. स्थित्यर्थक पूर्ण अकर्मक क्रिया
2. गत्यर्थक पूर्ण अकर्मक क्रिया
3. अपूर्ण अकर्मक क्रिया

सरचना के आधार पर क्रिया निम्नलिखित प्रकार की होती है

1. सामान्य क्रिया – क्रिया के जिस रूप से काल – विशेष का पता न हो और उसके पीछे ना लगा हो उसे क्रिया का सामान्य रूप कहा जाता है,अर्थात जहाँ केवल एक क्रिया का प्रयोग होता है वह सामान्य क्रिया कहलाती है जैसे – रोना, धोना, खाना ,पीना , नाचना आदि

2. संयुक्त क्रिया – संयुक्त क्रिया भी दो क्रियाओं के योग से बनती है ,जब वाक्य में दो या दो से अधिक धातुओं के मेल से बनी क्रियाएँ की जाती है वे संयुक्त क्रिया कहलाती है जैसे –
1. मोहन नाचने लगा ,
2. प्रियंका ने दूध पी लिया
3. उसने कर लिया
4. वह खा चुका
इन वाक्यों में नाचने लगा,पी लिया,कर लिया, खा चुका इन शब्दों को संयुक्त क्रिया कहते है इनमे दो क्रियाएँ का योग है इसमें पहली क्रिया मुख्य क्रिया होती है और दूसरी क्रिया सहायक क्रिया के रूप में मुख्य क्रिया में विशेषता लाती है

3. नामधातु क्रिया – क्रिया की जो धातुएं संज्ञा ,सर्वनाम विशेषण आदि से बनती है वे नामधातु क्रियाएँ कहलाती है जैसे – टकराना ,शरमाना ,ललचना ,सठियाना ,गरमाना ,अपनाना ,दोहराना ,चिकनापन आदि

4. प्रेरणार्थक क्रिया – जब कर्ता स्वयं कार्य न करके किसी अन्य से उस कार्य को करने की प्रेरणा देता है ,उसे प्रेरणार्थक क्रिया कहते है जैसे –सुनना ,लिखना ,पढ़ाना,कराना
1. अध्यापक बच्चे से पाठ पढवाता है
2. रमेश अपने बेटे से काम करवाता है

5. पूर्वकालिक क्रिया – जिन वाक्यों में दो क्रियाओं की आवश्यकता पड़ती है और जो क्रिया मुख्य क्रिया से पहले समाप्त हो जाती है उस क्रिया को पूर्वकालिक क्रिया कहते है जैसे –
1. ख़िलाड़ी क्रिकेट खेलकर बैठ गए
2. श्याम पढ़कर सो गया
3. अनुज खाना खाकर स्कूल गया
4. बच्चा दूध पीते ही सो गया।
6. तात्कालिक क्रिया – यह क्रिया भी मुख्य क्रिया से पहले समाप्त हो जाती है ,पर इसमें और मुख्य क्रय में समय का अंतर नहीं होता ,केवल क्रम का अंतर होता है जैसे –
1. वह आते ही सो गया
2. शेर को देखते ही वह बेहोश हो गया

7. कृदत क्रिया – जब किसी क्रिया में प्रत्यय जोड़कर उसका नया क्रिया रूप बनाया जाता है तो उसे कृदत क्रिया कहते है

8. यौगिक क्रिया – जिस वाक्य में दो क्रियाएँ एक साथ आती हो और दोनों मिलकर मुख्य क्रिया का काम करती हो ,उसे यौगिक क्रिया कहते है इसमें पहली क्रिया पूर्णकालिक होती है जैसे –
1. वह समान रख गया
2. परीक्षा सिर पर आ पहुँची है
3. मैंने पत्र लिख भेजा

9. द्विकर्मक क्रिया – जिस सकर्मक क्रिया का फल दो कर्मों पर पड़े , उसे द्विकर्मक क्रिया कहते है जैसे –
1. रमेश ने साँप को डंडा मारा
2. सोहन दूध पी रहा है

अपूर्ण क्रिया

कर्ता के रहते जो अकर्मक क्रिया तथा कर्ता और कर्म के रहते जो सकर्मक क्रिया पूरा अर्थ न दे ,उसे अपूर्ण क्रिया कहते है जैसे –
1. मैं अगले वर्ष बन जाऊंगा
2. जवाहरलाल नेहरु भारत के थे
अपूर्ण क्रिया के अर्थ को पूरा करने के लिए जो शब्द लगाया जाता है ,उसे पूरक कहते है ;जैसे –
1. मैं अगले वर्ष अध्यापक बन जाऊंगा
2. जवाहरलाल नेहरु भारत के प्रधानमंत्री थे

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